अखिल भारतीय इतिहास-संकलन योजना
Akhil Bharatiya Itihas Sankalan Yojna

महाभारत-युद्ध की तिथि 3139-'38 ई॰पू॰


यह योजना का चौथा प्रकल्प है। महाभारत-युद्ध विश्व-महत्त्व की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। यह युद्ध कब घटित हुआ, इस प्रश्न का उत्तर ढूँढ़ लेने पर भारतीय-इतिहास की काल-संबंधी बहुत-सी गुत्थियाँ सुलझ सकती हैं। वस्तुतः महाभारत-युद्ध की घटना भारतीय इतिहास का काल-निर्धारण करने का एक महत्त्वपूर्ण प्रस्थान-बिन्दु है जहाँ से मगध के राजवंशों की सुनिश्चित राजवंशावलियाँ प्राप्त हो जाती हैं।

अंग्रेज़ों द्वारा भारत के इतिहास के पुनर्लेखन के लिए लन्दन में 'रायल एशियाटिक सोसाइटी आफ़ ग्रेट ब्रिटेन'और कलकत्ता में 'एशियाटिक सोसाइटी आफ़ बंगाल'की स्थापना की गई थी। इस सोसाइटी के इतिहासकार महाभारत-युद्ध की ऐतिहासिकता को अमान्य करके रोमन और यूनानी-अभिलेखों में भारतीय-इतिहास का प्रस्थान-बिन्दु खोजने का प्रयत्न करने लगे। इस प्रयास के दौरान उन्हें सिकन्दर के भारत पर आक्रमण करने की तिथि 327 ई॰पू॰ यूनानी-अभिलेखों से मिली। तब उन्होने निष्कर्ष निकाला कि केवल यही तिथि ठीक है और भारत का इतिहास इसी तिथि को मानकर लिखा जा सकता है। इस प्रकार उन्होंने एकपक्षीय घोषणा कर दी कि भारतीय-कालक्रम का आधार-बिन्दु यही तिथि है। तत्कालीन अंग्रेज़-शासकों ने इस तिथि को सरकारी तौर पर स्वीकार कर लिया। बाद में इसी तिथि को आधार मानकर मौर्य, गुप्तादि राजाओं व गौतम बुद्ध, आद्य शंकराचार्य इत्यादि का मनगढ़न्त काल-निर्धारण भी कर लिया गया जिससे भारतीय-इतिहास में लगभग 1,300 वर्ष गायब हो गये।
अखिल भारतीय इतिहास-संकलन योजना ने राष्ट्रीय स्तर पर विद्वानों की सहमति प्राप्त करके महाभारत-युद्ध और भगवान श्रीकृष्ण की ऐतिहासिकता सुनिश्चित करते हुए युद्ध की तिथि 3139-'38 ई॰पू॰ निश्चित की है। युद्ध के पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर ने 36 वर्ष, 8 मास और 25 दिनों तक शासन किया था। उसी 37वें वर्ष में भगवान् श्रीकृष्ण अपने परमधाम को पधारे। जिस दिन वह गोलोक सिधारे, उसी दिन, उसी समय 28वें कलियुग का प्रारम्भ हो गया था। इस प्रकार कलियुग महाभारत-युद्ध के 36 वर्ष बाद (3138-36=) अर्थात् 3102 ई॰पू॰ में प्रारम्भ हुआ। इस गणना से कलियुग का वर्तमान में (3102+2013=) 5115वाँ वर्ष चल रहा है जो भारत में प्रचलित सभी पंचांगों द्वारा मान्य है। नवीनतम पुरातात्त्विक खोजें भी योजना की उपर्युक्त मान्यता को पुष्ट करती हैं।

 

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