अखिल भारतीय इतिहास-संकलन योजना
Akhil Bharatiya Itihas Sankalan Yojna

जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य की तिथि 509-477 ई॰पू॰


अखिल भारतीय इतिहास-संकलन योजना के प्रकल्पों में जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य की प्रामाणिक तिथि का निर्धारण भी सम्मलित है। यह सर्वमान्य तथ्य है कि आद्य शंकराचार्य और बुद्ध के मध्य लगभग 13 शताब्दियों का अन्तर था और शंकराचार्य, बुद्ध के उत्तरवर्ती थे। इस तथ्य के आधार पर ही यूरोपीय और मार्क्सवादी-इतिहासकारों ने अपने द्वारा निर्धारित बुद्ध की तिथि (छठी शताब्दी ई॰पू॰) से लगभग 1,300 वर्ष बाद, अर्थात् 788-820 ई॰ में शंकराचार्य का काल निश्चित किया है। आद्य शंकराचार्य ने अपने जीवनकाल में भारतवर्ष में 5 स्थानों पर मठ की स्थापना की जो क्रमशः 1. ज्योतिर्मठ (बद्रिकाश्रम), 2. शारदा मठ (द्वारका), 3. शारदा मठ (श्रृंगेरी, कर्नाटक), 4. गोवर्धन मठ (पुरी) एवं 5. कामकोटि मठ (काँची, तमिलनाडु) के नाम से सुप्रसिद्ध हैं।

इनके से गोवर्धन मठ, द्वारका शारदा मठ एवं काँची कामकोटि मठ में क्रमशः 144, 78 एवं 70 उत्तराधिकारियों (शंकराचार्यों) की अखण्डित परम्परा चली आ रही है और इन तीनों मठों में अपने पूर्ववर्ती शंकराचार्यों की विस्तृत सूची सुरक्षित है जिनमें प्रत्येक शंकराचार्य का वास्तविक नाम, उनका पीठासीन-वर्ष, कार्यकाल, निर्वाण-तिथि तथा स्थान का प्रामाणिकता से उल्लेख है। ये सभी सूचियाँ उसी समय से अद्यतन (अप-टू-डेट) की जा रही हैं जबसे वहाँ पर मठ की स्थापना की गई है। इन सूचियों से आद्य शंकराचार्य का काल 509-477 ई॰पू॰ निश्चित होता है न कि 8वीं शताब्दी ईसवी।

 

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